कानपुर। हर्निया को कई लोग शुरुआत में मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कमर या पेट के किसी हिस्से में दिखाई देने वाली छोटी-सी उभरी हुई गांठ लंबे समय तक बहुत ज्यादा परेशानी नहीं देती। लेकिन कुछ मामलों में यही समस्या धीरे-धीरे इतनी गंभीर हो सकती है कि सामान्य जीवन प्रभावित होने लगे।
कानपुर में सामने आए एक दुर्लभ और जटिल मामले में एक मरीज का ग्रोइन-स्क्रोटल हर्निया कई वर्षों में इतना बड़ा हो गया कि अंडकोष की थैली घुटने के करीब तक पहुंच गई। मरीज को चलने में परेशानी होती थी। कपड़े पहनना भी मुश्किल हो गया था।
लंबे समय तक इस स्थिति के साथ रहने के कारण मरीज ने इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा ही मान लिया था।
जांच के बाद पता चला कि हर्निया के रास्ते आंत का एक बड़ा हिस्सा अंडकोष की थैली तक खिसक चुका था। ऐसे मामलों में सर्जरी केवल हर्निया को बंद करने तक सीमित नहीं रहती। पेट के अंदर मौजूद अंगों को वापस उनकी जगह लाना और फिर पेट की दीवार को सुरक्षित तरीके से बंद करना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
आखिर इतना बड़ा कैसे हो सकता है हर्निया?
हर्निया उस स्थिति को कहा जाता है जब शरीर के अंदर का कोई अंग या ऊतक आसपास की कमजोर मांसपेशी या ऊतक की दीवार से बाहर की ओर उभरने लगता है।
ग्रोइन यानी जांघ और पेट के निचले हिस्से के बीच का क्षेत्र हर्निया की आम जगहों में शामिल है। जब यह हर्निया आगे बढ़कर अंडकोष की थैली तक पहुंच जाता है, तो इसे Inguinoscrotal Hernia कहा जाता है।
बहुत लंबे समय तक रहने वाले बड़े हर्निया में स्थिति और जटिल हो सकती है। कुछ मामलों में पेट के अंदर मौजूद आंत का काफी हिस्सा हर्निया की थैली में चला जाता है। इसे चिकित्सा साहित्य में Loss of Domain जैसी स्थिति से जोड़ा जाता है।
इसका मतलब सरल भाषा में यह है कि पेट के अंदर की जगह और हर्निया की थैली में मौजूद अंगों के बीच सामान्य संतुलन बिगड़ चुका होता है। ऐसे मामलों में आंत को अचानक वापस पेट में डालना भी शरीर के लिए चुनौती बन सकता है।
वैज्ञानिक साहित्य में Giant Inguinoscrotal Hernia को एक दुर्लभ और तकनीकी रूप से कठिन सर्जिकल स्थिति बताया गया है। लंबे समय तक हर्निया के अंदर आंत रहने से उसे वापस पेट में लाने के बाद पेट के अंदर दबाव बढ़ने और सांस तथा हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम हो सकता है।
आंत का बड़ा हिस्सा अंडकोष की थैली तक पहुंच गया था
डॉ. अभिमन्यु कपूर के अनुसार, मरीज के मामले में समस्या कई वर्षों से बनी हुई थी। सूजन धीरे-धीरे बढ़ती गई।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसका असर रोजमर्रा के कामों पर पड़ने लगा। चलना मुश्किल था और सामान्य कपड़े पहनना भी आसान नहीं रह गया था।
जांच में सामने आया कि आंत का एक बड़ा हिस्सा हर्निया के रास्ते स्क्रोटम यानी अंडकोष की थैली में पहुंच चुका था।
ऐसे मामलों में सर्जन के सामने दो प्रमुख चुनौतियां होती हैं। पहली, हर्निया में गई आंत को सुरक्षित तरीके से पेट के अंदर वापस लाना। दूसरी, पेट की दीवार को इस तरह मजबूत करना कि दोबारा हर्निया बनने का खतरा कम हो।
सर्जरी से पहले पेट की दीवार तैयार की गयी
इस मामले की एक खास बात सर्जरी से पहले की गई तैयारी थी। डॉ. अभिमन्यु कपूर की मेडिकल टीम ने पेट की दीवार की मांसपेशियों को रिलैक्स करने के लिए बोटुलिनम टॉक्सिन का इस्तेमाल किया। इसका उद्देश्य पेट की दीवार की मांसपेशियों में तनाव कम करना और लंबे समय से बाहर मौजूद आंत को वापस पेट में लाने की प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सुरक्षित बनाना था।
यह तकनीक हर हर्निया मरीज के लिए सामान्य उपचार नहीं है। इसका इस्तेमाल खास तौर पर चुनिंदा जटिल और बड़े हर्निया में विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है।
हालिया शोध भी इस बात की ओर इशारा करता है कि जटिल हर्निया में सर्जरी से पहले बोटुलिनम टॉक्सिन पेट की बाहरी मांसपेशियों को लंबा और रिलैक्स करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल की विधि और मरीज के चयन को लेकर अभी भी मानकीकरण की जरूरत है।
और एक महत्वपूर्ण बात—यह तकनीक अभी ऐसा इलाज नहीं है जिसे हर बड़े हर्निया में नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाए। 2026 की एक Scoping Review में giant Inguinal Hernia के लिए उपलब्ध अध्ययनों की संख्या सीमित और प्रोटोकॉल में काफी अंतर वाला पाया गया। इसलिए इसका उपयोग विशेषज्ञों के निर्णय के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
मरीज को दिल की बीमारी भी थी
सर्जरी की योजना बनाते समय मरीज की एक अन्य स्वास्थ्य समस्या को भी ध्यान में रखना पड़ा।
मरीज को पहले से माइट्रल स्टेनोसिस था। यह हृदय के माइट्रल वाल्व के संकरा होने की स्थिति है, जिसमें हृदय से रक्त के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
इतने बड़े हर्निया को पेट के अंदर वापस लाने से शरीर के अंदर दबाव और रक्त प्रवाह में बदलाव हो सकते हैं। इसलिए ऐसे मरीजों में केवल सर्जिकल टीम ही नहीं, बल्कि एनेस्थीसिया और संबंधित विशेषज्ञों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण होता है।
इसी वजह से सर्जरी से पहले मरीज को चिकित्सकीय रूप से तैयार किया गया।
चार सप्ताह बाद हुई लैप्रोस्कोपिक हर्निया रिपेयर

डॉ. कपूर ने बताया कि प्रारंभिक तैयारी के लगभग चार सप्ताह बाद मरीज की लैप्रोस्कोपिक हर्निया रिपेयर की गई।
सर्जरी के दौरान आंत को वापस पेट की कैविटी में लाया गया। इसके बाद हर्निया वाले कमजोर हिस्से को सर्जिकल मेश की मदद से मजबूत किया गया।
ऑपरेशन का उद्देश्य केवल बाहर निकली सूजन को खत्म करना नहीं था। पेट की सामान्य संरचना को यथासंभव बहाल करना और कमजोर हिस्से को मजबूत करना भी इसका अहम हिस्सा था।
बड़े और लंबे समय से मौजूद हर्निया में यही वजह है कि सर्जरी की योजना मरीज की स्थिति के हिसाब से बनाई जाती है।
ऑपरेशन के बाद किडनी की कार्यक्षमता में आया अस्थायी बदलाव
सर्जरी के बाद मरीज को पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लगा।
डॉ. अभिमन्यु कपूर ने बताया कि पेट के अंदर दबाव बढ़ने के कारण उसकी किडनी की कार्यक्षमता में कुछ समय के लिए बदलाव देखा गया। हालांकि, मल्टीडिसिप्लिनरी देखभाल के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और उसे स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
यह हिस्सा इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
विशाल हर्निया को अचानक पेट के अंदर वापस लाना केवल स्थानीय समस्या का समाधान नहीं है। शरीर के भीतर दबाव और अंगों के काम करने के तरीके पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसी कारण Giant Hernia Surgery में ऑपरेशन से पहले की योजना और ऑपरेशन के बाद निगरानी दोनों महत्वपूर्ण होती हैं। प्रकाशित केस रिपोर्टों में भी बड़े Inguinoscrotal Herniaको पेट में वापस लाने के बाद Cardiopulmonary और Abdominal Pressure से जुड़ी जटिलताओं की संभावना पर चर्चा की गई है।
ऑपरेशन के बाद किडनी की कार्यक्षमता में आया अस्थायी बदलाव
सर्जरी के बाद मरीज को पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लगा।
पेट के अंदर दबाव बढ़ने के कारण उसकी किडनी की कार्यक्षमता में कुछ समय के लिए बदलाव देखा गया। हालांकि, मल्टीडिसिप्लिनरी देखभाल के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और उसे स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
यह हिस्सा इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
विशाल हर्निया को अचानक पेट के अंदर वापस लाना केवल स्थानीय समस्या का समाधान नहीं है। शरीर के भीतर दबाव और अंगों के काम करने के तरीके पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसी कारण Giant Hernia Surgery में ऑपरेशन से पहले की योजना और ऑपरेशन के बाद निगरानी दोनों महत्वपूर्ण होती हैं। प्रकाशित केस रिपोर्टों में भी बड़े Inguinoscrotal Herniaको पेट में वापस लाने के बाद Cardiopulmonary और Abdominal Pressure से जुड़ी जटिलताओं की संभावना पर चर्चा की गई है।
कई साल बाद पहली बार पहनी जींस
मरीज की रिकवरी की सबसे मानवीय तस्वीर उसके फॉलोअप के दौरान सामने आई।
कई वर्षों तक बड़ी सूजन के कारण सामान्य कपड़े पहनना मुश्किल था। लेकिन इलाज के बाद वह फॉलोअप के लिए जींस पहनकर ओपीडी पहुंचा।
यह कोई मेडिकल टेस्ट नहीं था। लेकिन मरीज के लिए इसका महत्व अलग था।
कई साल तक जिस समस्या ने उसकी दिनचर्या और पहनावे तक को प्रभावित किया, उससे राहत मिलने के बाद सामान्य कपड़े पहन पाना उसके लिए सामान्य जिंदगी की ओर लौटने का प्रतीक बन गया।
स्वास्थ्य उपचार की सफलता कई बार केवल रिपोर्ट और स्कैन में नहीं दिखाई देती। मरीज दोबारा सामान्य तरीके से चल पा रहा है या अपने रोजमर्रा के काम कर पा रहा है—यह भी उपचार के परिणाम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हर्निया को वर्षों तक टालना क्यों ठीक नहीं?
हर्निया हमेशा तुरंत आपात स्थिति नहीं बनता। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हर हर्निया को वर्षों तक नजरअंदाज किया जा सकता है।
हर्निया बढ़ सकता है। दर्द और असुविधा बढ़ सकती है। कुछ मामलों में आंत या अन्य ऊतक हर्निया में फंस सकते हैं। ऐसी स्थिति में रक्त की आपूर्ति प्रभावित होने पर यह आपातकाल बन सकती है।
इसलिए शरीर में लगातार मौजूद या बढ़ती हुई असामान्य सूजन को केवल उम्र, वजन या सामान्य कमजोरी मानकर छोड़ देना उचित नहीं है।
खासकर अगर सूजन के साथ अचानक तेज दर्द, उल्टी, पेट फूलना, मल या गैस न निकलना अथवा सूजन का अंदर वापस न जाना जैसी समस्या हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
हर्निया के शुरुआती संकेत क्या हो सकते हैं?
ग्रोइन या पेट के आसपास दिखाई देने वाली गांठ इसका प्रमुख संकेत हो सकती है। कई बार खड़े होने, खांसने या वजन उठाने पर सूजन अधिक स्पष्ट दिखाई देती है।
इसके साथ खिंचाव, भारीपन या दर्द भी महसूस हो सकता है।
शुरुआती चरण में परेशानी कम होने के कारण मरीज इसे टाल सकते हैं। यही आदत बाद में समस्या को जटिल बना सकती है।
हर सूजन हर्निया नहीं होती। इसलिए खुद से निदान करने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
इस मामले से सबसे बड़ी सीख क्या है?
इस घटना को केवल एक दुर्लभ सर्जरी की सफलता के रूप में देखना अधूरा होगा।
इसका सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि लंबे समय से मौजूद हर्निया को सामान्य मानकर उसके साथ जीते रहना जरूरी नहीं है।
जितना बड़ा और पुराना हर्निया होता जाता है, इलाज की योजना उतनी जटिल हो सकती है। कुछ चुनिंदा मरीजों में सर्जरी से पहले पेट की दीवार को तैयार करने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इनका फैसला मरीज की जांच, हर्निया के आकार, अन्य बीमारियों और विशेषज्ञ सर्जिकल मूल्यांकन के आधार पर होता है।
इस मामले में भी उपचार की सफलता के पीछे केवल लैप्रोस्कोपिक तकनीक नहीं थी। मरीज की पहले से मौजूद हृदय संबंधी समस्या, सर्जरी से पहले की तैयारी, आंत को सुरक्षित रूप से वापस लाना और ऑपरेशन के बाद निगरानी—सभी ने भूमिका निभाई।
शोध से क्या पता चलता है?
बड़े हर्निया में Botulinum Toxin को लेकर उपलब्ध शोध आशाजनक जरूर है, लेकिन इसे चमत्कारी या मानक उपचार कहना सही नहीं होगा। 2025 की एक Systematic Review और Meta-Analysis में Giant Incisional Herniaके संदर्भ में कुछ Postoperative Complications में कमी का संकेत मिला, लेकिन Fascial Closure और Recurrence पर स्पष्ट लाभ नहीं मिला। शोधकर्ताओं ने आगे बेहतर गुणवत्ता के अध्ययनों की जरूरत बताई।
इसी तरह, Giant Inguinoscrotal Hernia के लिए 2026 की Scoping Review में केवल सीमित संख्या में छोटे Observational Studies मिले। इसलिए इस तकनीक के लाभ और सही Protocol को लेकर अभी और शोध की आवश्यकता है।
यानी, इस मामले की सफलता को व्यापक रूप से यह कहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए कि हर बड़े हर्निया में बोटुलिनम टॉक्सिन जरूरी है। सही निष्कर्ष यह है कि चुनिंदा जटिल मामलों में विशेषज्ञों द्वारा ऐसी तकनीकें सर्जरी की तैयारी का हिस्सा बनाई जा सकती हैं।
Disclaimer :
यह लेख उपलब्ध समाचार सामग्री और प्रकाशित चिकित्सा शोध के आधार पर तैयार किया गया है। यह किसी व्यक्ति के लिए चिकित्सकीय निदान या उपचार की सलाह नहीं है। हर्निया के लक्षण होने पर योग्य सर्जन से जांच कराएं। तेज दर्द, उल्टी, पेट फूलना, सूजन का अचानक कठोर हो जाना या अंदर वापस न जाना जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लें। बोटुलिनम टॉक्सिन, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी या मेश रिपेयर का निर्णय केवल विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद किया जाना चाहिए।



