उत्तर प्रदेश में मौसमी फ्लू और H1N1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट किया गया है। टैमीफ्लू, ऑक्सीजन और जरूरी उपकरणों का स्टॉक रखने के साथ अधिक प्रभावित जिलों में अलग ओपीडी और आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। जानिए फ्लू में किन लोगों को ज्यादा खतरा है और किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
लखनऊ। तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और बदन दर्द को लोग अक्सर मौसम बदलने का असर मानकर घर पर ही दवा लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन कुछ लोगों में फ्लू तेजी से गंभीर हो सकता है। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों में सावधानी ज्यादा जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में मौसमी फ्लू और H1N1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को अलर्ट किया है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने 29 अगस्त को प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक कर अस्पतालों में जरूरी दवाओं, ऑक्सीजन और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता की समीक्षा की।
अस्पतालों में टैमीफ्लू से लेकर ऑक्सीजन तक तैयार रखने के निर्देश
समीक्षा बैठक में अस्पतालों में ओसेल्टामिविर यानी टैमीफ्लू, ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और ब्रोंकोडायलेटर्स का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है।
जिन जिलों में फ्लू के मामले ज्यादा हैं, वहां सांस से जुड़ी शिकायत वाले मरीजों के लिए अलग ओपीडी चलाने के निर्देश दिए गए हैं। फ्लू और बुखार के मरीजों के लिए अलग पंजीकरण काउंटर बनाने की बात भी कही गई है, ताकि उन्हें लंबे समय तक सामान्य मरीजों के साथ इंतजार न करना पड़े।
गंभीर मरीजों के लिए जिला और संयुक्त अस्पताल स्तर पर चार से छह आइसोलेशन बेड तैयार रखने को कहा गया है।
यह तैयारी इसलिए अहम है क्योंकि फ्लू के ज्यादातर मामले हल्के रहते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में संक्रमण निमोनिया या दूसरी गंभीर सांस की परेशानी का रूप ले सकता है।
टैमीफ्लू हर बुखार की दवा नहीं है
यह बात समझना बहुत जरूरी है।
ओसेल्टामिविर एंटीवायरल दवा है। इसे हर बुखार, जुकाम या खांसी में खुद से नहीं लेना चाहिए।
फ्लू की पुष्टि या मजबूत आशंका वाले ऐसे मरीजों में एंटीवायरल इलाज ज्यादा महत्वपूर्ण है जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया हो, बीमारी गंभीर या तेजी से बढ़ रही हो अथवा जिन्हें गंभीर जटिलताओं का ज्यादा खतरा हो। CDC की 2026 की गाइडलाइन भी ऐसे मरीजों में इलाज जल्द शुरू करने की सलाह देती है।
फ्लू की एंटीवायरल दवा बीमारी के शुरुआती दौर में सबसे ज्यादा फायदा करती है। आम तौर पर लक्षण शुरू होने के पहले 1 से 2 दिन के भीतर इलाज शुरू होने पर लाभ सबसे ज्यादा होता है। हालांकि गंभीर या हाई-रिस्क मरीजों में दो दिन बीत जाने के बाद भी डॉक्टर एंटीवायरल इलाज शुरू कर सकते हैं।
इसलिए टैमीफ्लू घर में रख लेना और जरूरत पड़ने पर खुद खा लेना सही तरीका नहीं है। इसकी जरूरत और खुराक डॉक्टर तय करते हैं।
फ्लू में एंटीबायोटिक क्यों नहीं?
एक आम गलती है—बुखार और खांसी हुई नहीं कि एंटीबायोटिक शुरू कर दी।
फ्लू वायरस से होने वाली बीमारी है। एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के खिलाफ काम करती है, वायरस के खिलाफ नहीं। इसलिए सामान्य फ्लू में एंटीबायोटिक फायदा नहीं करती। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से साइड इफेक्ट और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी समस्या बढ़ सकती है।
अगर फ्लू के साथ बैक्टीरियल संक्रमण भी हो गया है, तो डॉक्टर जांच के बाद एंटीबायोटिक दे सकते हैं।
किन लोगों को फ्लू में ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
फ्लू किसी को भी हो सकता है। लेकिन गंभीर बीमारी का खतरा सभी में समान नहीं होता।
65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और अस्थमा, COPD, हृदय रोग या डायबिटीज जैसी बीमारी वाले लोगों में खतरा अधिक हो सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को भी विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
ऐसे व्यक्ति को फ्लू जैसे लक्षण हों तो कई दिन घर पर इंतजार करना ठीक नहीं है। डॉक्टर से जल्दी संपर्क करना बेहतर है।
सांस लेने में परेशानी हो तो इंतजार न करें
सामान्य फ्लू में बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, सिरदर्द और थकान हो सकती है। लेकिन कुछ संकेत खतरे की घंटी हो सकते हैं।
सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या दबाव, लगातार बिगड़ती हालत, बहुत ज्यादा कमजोरी, भ्रम की स्थिति, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना अथवा ऑक्सीजन कम होना जैसे संकेत दिखें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
बच्चों में तेज या कठिन सांस, सुस्ती, पानी की कमी और हालत तेजी से बिगड़ना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में घर पर केवल बुखार की दवा देकर इंतजार करना ठीक नहीं है।
अस्पतालों की ऑनलाइन निगरानी भी तेज
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ के कैसरबाग स्थित स्वास्थ्य भवन में बने HOPE यानी हेल्थ ऑनलाइन पैरामीटर इवैल्यूएशन कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से अस्पतालों की ऑनलाइन व्यवस्था भी देखी।
अस्पतालों में दवा, ऑक्सीजन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। जहां कमियां मिलीं, वहां उन्हें तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए।
निगरानी के दौरान कुछ अस्पतालों में व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, जबकि कुछ जगहों पर सुधार की जरूरत सामने आई।
बाराबंकी के संयुक्त जिला चिकित्सालय के आपातकालीन वार्ड में सुबह सफाई व्यवस्था और बेडशीट बदलने का काम तय समय के बाद भी चल रहा था। अस्पताल प्रभारी से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए गए।
श्रावस्ती जिला अस्पताल में पांच कैमरे ऑफलाइन मिले। उन्हें तत्काल ऑनलाइन कराने के निर्देश दिए गए। गाजियाबाद और झांसी के अस्पतालों में आपातकालीन वार्ड के कैमरों की दिशा ठीक करने के निर्देश दिए गए।
लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। गोरखपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिला चिकित्सालय में इंटरनेट सेवा बाधित होने के कारण निगरानी व्यवस्था प्रभावित मिली। इसे जल्द ठीक कराने को कहा गया।
नेपाल सीमा से लगे जिलों पर भी नजर
नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में फ्लू और बुखार के मामलों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।
इन इलाकों में आने वाले मरीजों की जांच और इलाज में देरी न हो, इसके लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में मास्क के सही इस्तेमाल, हाथों की सफाई और खांसते-छींकते समय मुंह ढकने जैसे आसान उपायों के बारे में मरीजों और तीमारदारों को जागरूक करने को भी कहा गया है।
फ्लू से बचने के लिए क्या करें?
फ्लू से बचाव में रोजमर्रा की कुछ आदतें काम आती हैं।
बीमार व्यक्ति से नजदीकी संपर्क कम रखें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें। हाथों को साबुन से नियमित रूप से धोएं। भीड़भाड़ या बंद जगहों में, खासकर बीमारी फैलने के समय, मास्क का इस्तेमाल मददगार हो सकता है।
फ्लू वैक्सीन भी गंभीर बीमारी से बचाव का महत्वपूर्ण तरीका है। CDC के अनुसार 6 महीने और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए हर साल फ्लू वैक्सीन की सलाह दी जाती है, हालांकि भारत में वैक्सीन की जरूरत और समय व्यक्ति के जोखिम तथा स्थानीय सलाह के अनुसार डॉक्टर से तय करना बेहतर है।
घबराने की नहीं, समय पर सावधानी की जरूरत
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बुखार फ्लू है या हर फ्लू गंभीर बीमारी में बदल जाएगा।
ज्यादातर लोगों में फ्लू हल्का रहता है। लेकिन हाई-रिस्क व्यक्ति में बीमारी तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए लक्षणों को पहचानना और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर तक पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण है।
बुखार और खांसी को नजरअंदाज न करें, लेकिन खुद से टैमीफ्लू या एंटीबायोटिक भी शुरू न करें। खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग फ्लू जैसे लक्षण होने पर जल्द चिकित्सकीय सलाह लें।
फ्लू के खिलाफ सबसे अच्छी रणनीति डर नहीं, बल्कि सही जानकारी, समय पर इलाज और अस्पतालों की तैयारी है।
चिकित्सकीय अस्वीकरण : यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। फ्लू की जांच, एंटीवायरल दवा, उसकी खुराक या अस्पताल में भर्ती होने का फैसला व्यक्ति की उम्र, लक्षण, दूसरी बीमारियों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाना चाहिए।



