लखनऊ, 30 अगस्त 2026। उम्र बढ़ने के साथ दांतों की समस्या को अक्सर लोग सामान्य मानकर टाल देते हैं। दांतों में दर्द नहीं है तो जांच की जरूरत नहीं—यह सोच आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकती है। मसूड़ों से खून आना, दांतों का ढीला होना, मुंह का सूखना या डेन्चर में परेशानी जैसे संकेतों पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है।
इसी बात को लेकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौखिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं दंत परीक्षण शिविर लगाया गया। 29 अगस्त को आयोजित इस शिविर में करीब 150 वरिष्ठ नागरिकों की जांच की गई।
उम्र बढ़ने पर मुंह की सेहत क्यों बदल जाती है?
बढ़ती उम्र के साथ दांतों और मसूड़ों में कई तरह के बदलाव हो सकते हैं। दांतों की ऊपरी परत कमजोर हो सकती है। मसूड़ों की समस्या बढ़ सकती है। कई बुजुर्गों को मुंह सूखने की शिकायत भी रहती है।
मुंह का सूखापन केवल असहजता नहीं है। इससे खाना चबाने और निगलने में परेशानी हो सकती है तथा दांतों में सड़न का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ दवाओं के कारण भी मुंह सूख सकता है। इसलिए बुजुर्गों में दांतों की जांच के दौरान उनकी चल रही दवाओं और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है।
KGMU में वरिष्ठ नागरिकों की हुई दंत जांच
KGMU के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स विभाग ने इंडियन सोसाइटी ऑफ प्रोस्थोडॉन्टिक्स-रिस्टोरेटिव-पेरियोडॉन्टिक्स (ISPRP) और सार्वजनिक शिक्षण संस्थान, लखनऊ के सहयोग से यह शिविर आयोजित किया।

कार्यक्रम में डॉ. प्रमिला वर्मा, डॉ. रिदम, डॉ. निशी सिंह और डॉ. विवेक बैंस ने वरिष्ठ नागरिकों को दांतों और मसूड़ों की देखभाल के बारे में जानकारी दी।
बात केवल दांतों को साफ रखने तक सीमित नहीं रही। विशेषज्ञों ने नियमित ब्रश करने, मसूड़ों की देखभाल, डेन्चर को साफ रखने और समय-समय पर दंत चिकित्सक से जांच कराने पर जोर दिया।
डेन्चर लगाने वालों को भी सावधानी जरूरी
उम्र बढ़ने पर कई लोगों को डेन्चर की जरूरत पड़ती है। लेकिन डेन्चर लग जाने के बाद दांतों की देखभाल खत्म नहीं हो जाती।
डेन्चर को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। मुंह और मसूड़ों की सफाई भी जरूरी है। डेन्चर ढीला हो गया है, दर्द कर रहा है या मुंह में घाव हो रहे हैं तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
शिविर में वरिष्ठ नागरिकों को इसी तरह की रोजमर्रा की सावधानियों के बारे में भी बताया गया।
दांतों की समस्या को उम्र का हिस्सा मानकर न छोड़ें
मसूड़ों से बार-बार खून आना, लगातार मुंह से बदबू आना, दांतों का हिलना, चबाने में दर्द, मुंह में घाव या लंबे समय तक रहने वाला कोई बदलाव दंत चिकित्सक को दिखाने की वजह हो सकता है।
खासकर ऐसा घाव जो ठीक नहीं हो रहा हो, उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक बने रहने वाले ऐसे बदलावों की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
यही वजह है कि बुजुर्गों के लिए नियमित दंत जांच को सामान्य स्वास्थ्य जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए।
मौखिक स्वास्थ्य का असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है
मुंह और शरीर की सेहत अलग-अलग नहीं हैं। गंभीर मसूड़ों की बीमारी को कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के साथ जोड़ा गया है। हालांकि किसी एक बीमारी को केवल मसूड़ों की बीमारी का नतीजा मानना सही नहीं होगा, लेकिन अच्छी मौखिक स्वच्छता और नियमित दंत देखभाल से कई तरह की परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इस उम्र में कई लोग एक साथ कई दवाएं लेते हैं और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण नियमित स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत होती है।
शिविर में बांटी गई डेंटल केयर किट
शिविर में KGMU के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स विभाग के स्नातकोत्तर छात्रों की टीम ने वरिष्ठ नागरिकों की दंत जांच की। उनकी मौखिक स्वास्थ्य स्थिति और इलाज की जरूरत का आकलन किया गया।
जिन लोगों को आगे उपचार की जरूरत थी, उन्हें उचित दंत चिकित्सा के बारे में सलाह दी गई। इसके अलावा प्रतिभागियों को डेंटल केयर किट और व्यक्तिगत स्वच्छता की सामग्री भी दी गई।
करीब 150 वरिष्ठ नागरिक इस शिविर से लाभान्वित हुए।
बुजुर्गों के लिए छोटी आदतें, बड़ा फायदा
वरिष्ठ नागरिकों के लिए दांतों की देखभाल का सबसे आसान तरीका है—रोजाना अच्छी तरह ब्रश करना, मसूड़ों की सफाई रखना, डेन्चर को साफ रखना और दांतों से जुड़ी परेशानी को लंबे समय तक न टालना।
हर दर्द कैंसर नहीं होता। हर मसूड़े से खून आना भी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन बिना जांच के किसी समस्या को सामान्य मान लेना भी ठीक नहीं है।
KGMU में आयोजित यह शिविर इसी जरूरी संदेश को सामने लाता है कि स्वस्थ उम्र बढ़ने का मतलब केवल ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखना नहीं है। मुंह और दांतों की सेहत भी स्वस्थ जीवन का अहम हिस्सा है।



