IMA-UPCWC-Meeting : लखनऊ। किसी शहर को कोई बड़ी ज़िम्मेदारी मिलने में बरसों लग जाते हैं, और कई बार दशकों भी। लखनऊ के चिकित्सा जगत के लिए भी कुछ ऐसा ही हुआ — करीब 22 साल के लंबे इंतज़ार के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की उत्तर प्रदेश स्टेट वर्किंग कमेटी की बैठक की मेज़बानी एक बार फिर लखनऊ शाखा को मिली। यह सिर्फ एक बैठक भर नहीं थी, बल्कि प्रदेशभर के चिकित्सकों के लिए विचार-विमर्श, ज्ञान-साझाकरण और सरकार से सीधे संवाद का एक बड़ा मंच बन गई।
लखनऊ में जुटे प्रदेशभर के चिकित्सक
23 अगस्त 2026, रविवार को लखनऊ के आमोद रिज़ॉर्ट में IMA उत्तर प्रदेश राज्य की तीसरी स्टेट वर्किंग कमेटी (SWC) मीटिंग 2026 का आयोजन हुआ, जिसकी मेज़बानी IMA लखनऊ ब्रांच ने की। उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों से आए IMA के प्रदेश पदाधिकारी, स्टेट वर्किंग कमेटी के सदस्य, अलग-अलग शाखाओं के प्रतिनिधि और वरिष्ठ चिकित्सक इस बैठक में शामिल हुए। बैठक में सिर्फ औपचारिकताएं नहीं निभाई गईं — चिकित्सकों से जुड़े अहम मुद्दों, संगठन की गतिविधियों, स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की सुरक्षा तथा पेशेवर हितों जैसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर बातचीत हुई। कार्यक्रम के शुरुआती सत्र में IMA उत्तर प्रदेश राज्य के संरक्षक और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शरद कुमार अग्रवाल ने संगठन को और असरदार बनाने, समाज और डॉक्टरों के बीच भरोसा मज़बूत करने, तथा सरकार से सकारात्मक संवाद के ज़रिए मसलों को सुलझाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इसके बाद कमेटी ने पिछली बैठक के फैसलों की प्रगति की समीक्षा की और आने वाले महीनों की रणनीति पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात : क्या निकला हासिल
इस बैठक की एक बड़ी खबर यह रही कि 22 अगस्त 2026 को, यानी SWC मीटिंग से एक दिन पहले, IMA के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। डॉ. शरद कुमार अग्रवाल और IMA उत्तर प्रदेश राज्य अध्यक्ष डॉ. राजीव गोयल ने बताया कि यह मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। इस दौरान चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी विभिन्न समस्याएं सीधे सरकार के सामने रखी गईं, और उन पर सार्थक चर्चा हुई। IMA पदाधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार और चिकित्सा समुदाय के बीच संवाद लगातार मज़बूत हो रहा है — मुख्यमंत्री तक जब भी डॉक्टरों की समस्याएं पहुंचाई जाती हैं, तो उन्हें गंभीरता से सुना जाता है और समाधान के लिए सकारात्मक पहल की जाती है। संगठन ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार के साथ रचनात्मक सहयोग बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
एक ही छत के नीचे संगठन और शिक्षा
SWC मीटिंग के साथ-साथ IMA लखनऊ ब्रांच ने स्टेट लेवल रिफ्रेशर कोर्स एंड CME 2026 का भी आयोजन किया, और यही इस कार्यक्रम को दोहरा महत्व देता है। संगठनात्मक बैठक तो होती ही रहती है, लेकिन जब उसी मंच पर 16 विशेषज्ञ चिकित्सक अपने-अपने क्षेत्र का ताज़ा ज्ञान साझा करने आ जाएं, तो बात कहीं आगे बढ़ जाती है। किडनी प्रत्यारोपण, तपेदिक, गंभीर अस्थमा, सिर और गर्दन का कैंसर, हड्डी में असामान्य फ्रैक्चर, बाइल डक्ट इंजरी, फर्टिलिटी, रोबोटिक सर्जरी, लिवर प्रत्यारोपण, आधुनिक नियोनेटोलॉजी, चिकित्सा पेशे से जुड़े विषय, ड्राई आई, मेटाबॉलिक मेडिसिन, अनिद्रा, हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ और इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसे कई अहम और समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। डॉ. दीपक देवां, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. अभिषेक टंडन, डॉ. नीरज टंडन, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. अजय कुमार पटवा, डॉ. वरदा अरोड़ा, डॉ. अनिल खन्ना, डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीक़ी, डॉ. गीतांजलि, डॉ. आर.बी. सिंह, डॉ. अभा दलाले, डॉ. सुधीर कुमार वर्मा, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. राकेश श्रीवास्तव और डॉ. राजीव सक्सेना — इन सभी विशेषज्ञों ने अपने वर्षों के क्लिनिकल अनुभव को इस मंच से साझा किया। CME की वैज्ञानिक समिति में डॉ. संजय श्रीवास्तव वैज्ञानिक अध्यक्ष रहे, जबकि डॉ. नीरज टंडन और डॉ. संतोष सिंह ने सह-अध्यक्ष, डॉ. अर्चिका गुप्ता और डॉ. शीतांशु ने वैज्ञानिक सचिव, तथा डॉ. शाश्वत सक्सेना और डॉ. नईम शेख ने संयुक्त सचिव की भूमिका निभाई।
मंच पर मौजूद रहीं प्रदेश की बड़ी चिकित्सा हस्तियां
इस आयोजन में IMA उत्तर प्रदेश राज्य के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें संरक्षक और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शरद कुमार अग्रवाल, राज्य अध्यक्ष डॉ. राजीव गोयल, निवर्तमान राज्य अध्यक्ष डॉ. पी.के. अग्रवाल, अध्यक्ष-निर्वाचित डॉ. रविश अग्रवाल, मानद राज्य सचिव डॉ. आशीष कुमार अग्रवाल, मानद वित्त सचिव डॉ. वाणी पुरी, राज्य संयोजक डॉ. वी.बी. जिंदल और राज्य समन्वयक डॉ. आनंद प्रकाश शामिल थे। इतने बड़े स्तर के पदाधिकारियों का एक साथ लखनऊ पहुंचना अपने आप में बताता है कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश के चिकित्सा संगठन के लिए कितना अहम था।
लखनऊ शाखा के लिए गर्व का पल
इस पूरे आयोजन की अगुवाई IMA लखनऊ ब्रांच के अध्यक्ष एवं आयोजन अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार अस्थाना और मानद सचिव एवं आयोजन सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुई। डॉ. मनोज कुमार अस्थाना ने कहा कि SWC मीटिंग और रिफ्रेशर कोर्स-CME का एक साथ आयोजन संगठनात्मक संवाद और सतत चिकित्सा शिक्षा, दोनों नज़रियों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि चिकित्सा विज्ञान जिस रफ़्तार से बदल रहा है, ऐसे शैक्षणिक मंच डॉक्टरों को नवीनतम जानकारी से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने इस मौके को लखनऊ ब्रांच के लिए बेहद गर्व का विषय बताते हुए कहा कि उनकी कोशिश रही कि प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों और चिकित्सकों को संगठनात्मक विचार-विमर्श के साथ-साथ एक सार्थक अकादमिक मंच भी मिले, ताकि विभिन्न विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों का नया ज्ञान और अनुभव प्रदेशभर के चिकित्सकों तक पहुंच सके।
इस आयोजन के मायने क्या हैं
ऐसे आयोजन सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं होते। जब प्रदेशभर से चिकित्सक एक मंच पर आकर सुरक्षा, पेशेवर हितों और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों पर बात करते हैं, तो इसका सीधा असर आम मरीज़ों तक भी पहुंचता है — क्योंकि एक सुरक्षित, संगठित और लगातार अपडेटेड रहने वाला चिकित्सा समुदाय ही बेहतर इलाज दे पाता है। मुख्यमंत्री स्तर पर सीधी बातचीत यह भी संकेत देती है कि डॉक्टरों की समस्याओं को नीति-निर्माण के स्तर पर सुना जा रहा है, हालांकि इन चर्चाओं का असली नतीजा आने वाले समय में ज़मीन पर होने वाले बदलावों से ही तय होगा। वहीं CME जैसे शैक्षणिक सत्र इस बात की गारंटी देने की कोशिश करते हैं कि जो डॉक्टर आपके शहर या कस्बे में बैठा है, उसे किडनी प्रत्यारोपण से लेकर डायबिटीज़ तक की नवीनतम जानकारी उतनी ही मिले, जितनी बड़े महानगरों के विशेषज्ञों को मिलती है।
निष्कर्ष : संगठन और शिक्षा की साझा राह
22 साल बाद लखनऊ को यह मेज़बानी मिलना सिर्फ एक शहर के लिए गर्व की बात नहीं, बल्कि इस बात का प्रतीक भी है कि संगठनात्मक मज़बूती और निरंतर चिकित्सा शिक्षा दोनों साथ-साथ चलें, तभी स्वास्थ्य सेवाओं में असली सुधार संभव है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई चर्चाएं किस तरह नीतिगत फैसलों में तब्दील होती हैं, और क्या इस तरह के आयोजन उत्तर प्रदेश के दूरदराज़ इलाकों तक भी बेहतर चिकित्सा ज्ञान और सुरक्षित कार्यस्थल पहुंचा पाते हैं।



