सीएसआईआर-एनबीआरआई ने लखनऊ के बन्थरा स्थित महर्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर में विकसित ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ राष्ट्र को समर्पित किया। इसका उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और सीएसआईआर के उपाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया। परिसर में दुर्लभ और संकटग्रस्त पौधों के उद्यान, नवग्रह व नक्षत्र वाटिका, 43 प्रजातियों वाला बांस उद्यान और डिजिटल सूचना तंत्र विकसित किया गया है।
लखनऊ। पर्यावरण शिक्षा और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई), लखनऊ ने बन्थरा स्थित महर्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर में विकसित ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ राष्ट्र को समर्पित किया। शनिवार को इसका उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और सीएसआईआर के उपाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
संस्थान के अनुसार, प्रकृति ज्ञान धाम को वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, भारतीय वनस्पति विरासत और जन-जागरूकता को एक साथ जोड़ने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसे एक एकीकृत इको-एजुकेशनल हब के रूप में तैयार किया गया है।
विज्ञान को समाज से जोड़ने पर जोर
उद्घाटन समारोह में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विज्ञान का लाभ समाज तक पहुंचना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उनके अनुसार, प्रकृति ज्ञान धाम विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए पर्यावरण शिक्षा तथा अनुभव आधारित सीखने का मंच बन सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने किसानों, उद्योगों और आम लोगों के हित में शोध को उपयोगी तकनीकों और उत्पादों में बदलने के लिए सीएसआईआर-एनबीआरआई के प्रयासों की भी सराहना की।

वनस्पति विरासत को करीब से जान सकेंगे लोग
सीएसआईआर-एनबीआरआई और सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू के निदेशक डॉ. जाबिर अहमद ने बताया कि प्रकृति ज्ञान धाम को भारत की समृद्ध वनस्पति विविधता के जीवंत संग्रह के रूप में विकसित किया गया है। यहां आने वाले लोग पौधों की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को अनुभव आधारित माध्यमों से समझ सकेंगे।
परिसर में भारतीय विरासत उद्यान, ‘पावन पथ’, संकटग्रस्त और राज्यीय पौधों के लिए समर्पित उद्यान, दुर्लभ पौधों के संग्रह, नवग्रह वाटिका और नक्षत्र वाटिका बनाई गई हैं। इसके अलावा एक अलग बांस उद्यान भी विकसित किया गया है। संस्थान के अनुसार, इसमें बांस की 43 प्रजातियां संरक्षित की गई हैं।
क्यूआर कोड से मिलेगी पौधों की जानकारी
प्रकृति ज्ञान धाम में डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है। यहां क्यूआर कोड आधारित सूचना और व्याख्या तंत्र विकसित किया गया है। इसके जरिए आगंतुक पौधों से जुड़ी वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी डिजिटल माध्यम से हासिल कर सकेंगे।
परिसर में प्रकृति पथ और पर्यावरण-अनुकूल विद्युत वाहनों की सुविधा भी शामिल की गई है। संस्थान के अनुसार, प्रस्तावित मियावाकी शहरी वन भी इस पहल का हिस्सा है।
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के विरासत उद्यानों पर आधारित एक फिल्म का टीजर भी जारी किया। फिल्म में देश की वनस्पति संपदा और उसके सांस्कृतिक, ऐतिहासिक तथा पारिस्थितिक महत्व को दिखाया गया है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली तकनीकें हस्तांतरित
कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-एनबीआरआई की ओर से विकसित कुछ उत्पादों और तकनीकों का अनावरण तथा हस्तांतरण भी किया गया। संस्थान द्वारा विकसित पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य से संबंधित एक हर्बल उत्पाद को हिमालया वेलनेस ने औपचारिक रूप से जारी किया।
इसके अलावा चार पादप-आधारित तकनीकें कुडुम्बश्री, केरल को हस्तांतरित की गईं। इनमें हर्बल एंटी-डैंड्रफ हेयर केयर ऑयल, फ्रोटस–कमल इत्र, फ्रोटस–रुद्र इत्र और हर्बल नैनो सीरम शामिल हैं।
संस्थान के अनुसार, इन तकनीकों का उद्देश्य विज्ञान आधारित उत्पादों के माध्यम से महिला उद्यमिता और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है।
कम लागत वाले जैव-रिएक्टर की तकनीक भी हस्तांतरित
सीएसआईआर-एनबीआरआई ने लखनऊ की विटवेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को कम लागत वाले प्रकाश-संश्लेषी जैव-रिएक्टर के डिजाइन और विकास की तकनीक भी हस्तांतरित की।
संस्थान का कहना है कि इस तरह की तकनीकें वैज्ञानिक शोध को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने में मदद कर सकती हैं। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, सीएसआईआर पुष्पकृषि मिशन से जुड़े लाभार्थी किसानों और अन्य अतिथियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह, केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा के कुलपति डॉ. अजीत कुमार शासनी, सीएसआईआर-एनबीआरआई एवं सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू के निदेशक डॉ. जाबिर अहमद सहित संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अन्य आमंत्रित अतिथि मौजूद रहे।



